वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
हिसाब रखा करो आजकल लोग बड़ी जल्दी पूछ लेते है तुमने मेरे लिए किया क्या है
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े
उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।
यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो आप हमेशा न जीतने का बहाना खोज लेंगे
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना
हिसाब रखा करो आजकल लोग बड़ी जल्दी पूछ लेते है तुमने मेरे लिए किया क्या है
क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े
उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।
यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो आप हमेशा न जीतने का बहाना खोज लेंगे