प्रेम सकल हो, भाव अटल हो मन को मन की आशा हो बिन बोले जो व्यथा जान ले वो अपनों की परिभाषा है
प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है
प्रेम सकल हो, भाव अटल हो मन को मन की आशा हो बिन बोले जो व्यथा जान ले वो अपनों की परिभाषा है
प्यार निभाना आना चाहिए हो तो सबको जाता है
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है