कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की जरूरत नहीं हैं और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नही हैं…
ये भी अच्छा है कि ये सिर्फ़ सुनता है, दिल अगर बोलता तो क़यामत हो जाती।
हर एक मिनट जिसमे आप क्रोधित रहते हैं, आप ६० सेकेण्ड की मन की शांति खोते हैं.
शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!
हम तो बेज़ान चीज़ों से भी वफ़ा करते हैं, तुझमे तो फिर भी मेरी जान बसी है।
कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है.
यदि आप सही हैं तो आपको गुस्सा होने की जरूरत नहीं हैं और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नही हैं…
ये भी अच्छा है कि ये सिर्फ़ सुनता है, दिल अगर बोलता तो क़यामत हो जाती।
हर एक मिनट जिसमे आप क्रोधित रहते हैं, आप ६० सेकेण्ड की मन की शांति खोते हैं.
शहर भर मेँ एक ही पहचान है ‘हमारी’ सुर्ख आँखे, गुस्सैल चेहरा और नवाबी अदायेँ’!
हम तो बेज़ान चीज़ों से भी वफ़ा करते हैं, तुझमे तो फिर भी मेरी जान बसी है।