हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते.. लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता
हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते.. लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता