वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
क्या गिला करें उन बातों से क्या शिक़वा करें उन रातों से कहें भला किसकी खता इसे हम कोई खेल गया फिर से जज़बातों से
वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
क्या गिला करें उन बातों से क्या शिक़वा करें उन रातों से कहें भला किसकी खता इसे हम कोई खेल गया फिर से जज़बातों से