कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

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कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!

कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!