कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

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जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..