कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

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बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

उसका वादा भी अजीब था, कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की, मोहब्बत के साथ….. या यादों के साथ…

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

उसका वादा भी अजीब था, कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की, मोहब्बत के साथ….. या यादों के साथ…

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!