दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।