कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

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खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

वक़्त पर ना जा वक़्त तो हर ज़ख्म की दावा है, आज तुमने हमे भुला दिया कल तुम्हे भी कोई भुला देगा

कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है, पर ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले

खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

वक़्त पर ना जा वक़्त तो हर ज़ख्म की दावा है, आज तुमने हमे भुला दिया कल तुम्हे भी कोई भुला देगा

कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है, पर ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले