उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो
बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...
उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो
बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...