कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

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मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!

दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!

दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है