वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......