मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है
किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है
मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता जरूर है..
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है
किसी पर कभी भी बहुत ज्यादा निर्भर ना रहे क्योकि अंधेरो में परछाई भी साथ छोड़ देती है