यदि लक्ष्य न मिले तो रास्ता बदलो क्योंकि वृक्ष अपनी पंक्तिया बदलते है जड़े नही.
अहंकार की बस एक खराबी है ये कभी आपको महसूस ही नही होने देता कि आप गलत है
झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'
कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते, पर अमीर जरूर बना देते हैं.
आँखे भी खोलनी पड़ती है उजाले के लिए, केवल सूरज के निकलने से ही अँधेरा नही जाता
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .
यदि लक्ष्य न मिले तो रास्ता बदलो क्योंकि वृक्ष अपनी पंक्तिया बदलते है जड़े नही.
अहंकार की बस एक खराबी है ये कभी आपको महसूस ही नही होने देता कि आप गलत है
झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'
कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते, पर अमीर जरूर बना देते हैं.
आँखे भी खोलनी पड़ती है उजाले के लिए, केवल सूरज के निकलने से ही अँधेरा नही जाता
तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .