शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।
सब कुछ खोने के बाद भी अगर आपमे हौसला है तो समझ लीजिए आपने कुछ नही खोया है
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।
सब कुछ खोने के बाद भी अगर आपमे हौसला है तो समझ लीजिए आपने कुछ नही खोया है