आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता है तो इसका मतलब आप उससे काफी ऊपर है।
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए
रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता है तो इसका मतलब आप उससे काफी ऊपर है।
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
आमदनी कम हो तो "ख़र्चों" पर क़ाबू रखिए जानकारी कम हो तो "लफ़्ज़ों" पर क़ाबू रखिए
रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..