सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
"बेबस कर दिया है, तूने अपने बस में करके......."
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबुत रखना जरा से भी चुके तो मोहबत हो जायेगी
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
कहतें हैं कि मोहबत एक बार होती है..पर मैं जब जब उसे देखता हूँ..मुझे हर बार होती है॥
"बेबस कर दिया है, तूने अपने बस में करके......."
मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबुत रखना जरा से भी चुके तो मोहबत हो जायेगी
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये