कहते है कि औरत की उम्र और पुरुष की कमाई कभी नही पूछनी चाहिए उसका अच्छा सा कारण यह है कि औरत कभी अपने लिए नही जीती और पुरुष कभी अपने लिए नही कमाता..
मुश्किल परिस्थितियों में मनुष्य को सहारे की आवश्यकता होती है सलाह की नही
खुद मालिक बनने की कोशिश जरूर करना क्योंकि आपका बॉस आपको अच्छी से अच्छी सैलरी देकर भी नौकर बना के रखेगा
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
कहते है कि औरत की उम्र और पुरुष की कमाई कभी नही पूछनी चाहिए उसका अच्छा सा कारण यह है कि औरत कभी अपने लिए नही जीती और पुरुष कभी अपने लिए नही कमाता..
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खुद मालिक बनने की कोशिश जरूर करना क्योंकि आपका बॉस आपको अच्छी से अच्छी सैलरी देकर भी नौकर बना के रखेगा
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..