वक़्त जरा सी करवट क्या ली गैरो की लाइन मैं सबसे आगे पाया अपनों का...

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मोहब्बत तो दिल से की थी, दिमाग उसने लगा लिया दिल तोड दिया मेरा उसने और इल्जाम मुझपर लगा दिया.

जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता.

” इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..”

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

मोहब्बत तो दिल से की थी, दिमाग उसने लगा लिया दिल तोड दिया मेरा उसने और इल्जाम मुझपर लगा दिया.

जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता.

” इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..”

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.