किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है।
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
पहचान से मिला काम थोड़े समय तक ही टिकता है लेकिन काम से मिली "पहचान" उम्र भर रहती है।
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
सच्चाई के रास्ते पर चलने में फायदा है क्योंकि इस रास्ते मे "भीड़ कम" मिलती है
किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है।
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
पहचान से मिला काम थोड़े समय तक ही टिकता है लेकिन काम से मिली "पहचान" उम्र भर रहती है।
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
सच्चाई के रास्ते पर चलने में फायदा है क्योंकि इस रास्ते मे "भीड़ कम" मिलती है