जिस दिन आपने सोच लिया कि अपने ज्ञान पा लिया है, उस दिन आपकी मृत्यु हो जाती है क्योकि अब न कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज अब आप एक मृत जीवन जियेंगे

जिस दिन आपने सोच लिया कि अपने ज्ञान पा लिया है, उस दिन आपकी मृत्यु हो जाती है क्योकि अब न कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज अब आप एक मृत जीवन जियेंगे

ओशो
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सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.

सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है

तुम व्यर्थ में ही अच्छे अवसरों को ढूंढने में लगे हो..तुम जिंदा हो क्या ये बड़ा अवसर नही हो

हारे हुए इंसान की सलाह, जीते हुए इंसान का अनुभव और ख़ुद का दिमाग़ आपको कभी हारने नहीं देगा

दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है

सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.

सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है

तुम व्यर्थ में ही अच्छे अवसरों को ढूंढने में लगे हो..तुम जिंदा हो क्या ये बड़ा अवसर नही हो

हारे हुए इंसान की सलाह, जीते हुए इंसान का अनुभव और ख़ुद का दिमाग़ आपको कभी हारने नहीं देगा

दुसरो को समझना बेशक बुद्धिमानी हो सकती है मगर खुद को समझना ही ज़िन्दगी का असली ज्ञान है

उम्मीद हमे कभी भी छोड़ कर नहीं जाती बस हम ही उसे छोड़ देते है