जिस दिन आपने सोच लिया कि अपने ज्ञान पा लिया है, उस दिन आपकी मृत्यु हो जाती है क्योकि अब न कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज अब आप एक मृत जीवन जियेंगे

जिस दिन आपने सोच लिया कि अपने ज्ञान पा लिया है, उस दिन आपकी मृत्यु हो जाती है क्योकि अब न कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज अब आप एक मृत जीवन जियेंगे

ओशो
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मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं

सिर्फ अपनी नही बल्कि दुसरो की गलतियों से भी सीखो, क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और समय कम

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।

प्रतिदिन हमें कुछ न कुछ नया ग्रहण करना चाहिए, फिर चाहे वह एक श्लोक, उसका एक अंश अथवा एक शब्द मात्र ही क्यों न हो. एक-एक शब्द ही एक दिन विशाल समुद्र का रूप धारण कर लेता है.

दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये

जहाँ दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना ही बेहतर होता है

मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं

सिर्फ अपनी नही बल्कि दुसरो की गलतियों से भी सीखो, क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और समय कम

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।

प्रतिदिन हमें कुछ न कुछ नया ग्रहण करना चाहिए, फिर चाहे वह एक श्लोक, उसका एक अंश अथवा एक शब्द मात्र ही क्यों न हो. एक-एक शब्द ही एक दिन विशाल समुद्र का रूप धारण कर लेता है.

दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये

जहाँ दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना ही बेहतर होता है