दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

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खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।

उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!

खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।

उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!