कभी तो ऐसी भी हवा चले कौन किसका है पता तो चले

कभी तो ऐसी भी हवा चले कौन किसका है पता तो चले

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वक़्त की ताक़त तुम क्या समझोगे ये उसका भी हो जाता है जिसका कोई नहीं होता।

जब वक़्त बुरा हो तो कोई हाल नहीं पूछता, पर जब अच्छा हो तो लोग वक़्त भी तुम ही से पूछते हैं।

भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.

वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.

भले ही अपने विश्वास तोड़ दे पर देखने ये भी है हम कितने खरे उतरते है उनके विश्वास पर धोखे तो मिलते रहते है बात ये है हम कितने सुदृढ़ रहते हैं

"व्यक्तित्व" की भी अपनी वाणी होती है, जो "कलम"' या "जीभ" के इस्तेमाल के बिना भी, लोगों के "अंर्तमन" को छू जाती है..

वक़्त की ताक़त तुम क्या समझोगे ये उसका भी हो जाता है जिसका कोई नहीं होता।

जब वक़्त बुरा हो तो कोई हाल नहीं पूछता, पर जब अच्छा हो तो लोग वक़्त भी तुम ही से पूछते हैं।

भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.

वैसे इंसान बनें जिस तरह के इंसान को आप पसंद करते हैं.

भले ही अपने विश्वास तोड़ दे पर देखने ये भी है हम कितने खरे उतरते है उनके विश्वास पर धोखे तो मिलते रहते है बात ये है हम कितने सुदृढ़ रहते हैं

"व्यक्तित्व" की भी अपनी वाणी होती है, जो "कलम"' या "जीभ" के इस्तेमाल के बिना भी, लोगों के "अंर्तमन" को छू जाती है..