पहचान बनानी है तो
जैसे आपके दोस्त होंगे वैसा ही आपका भविष्य बनेगा
गुरू केवल आपको शिक्षा दे सकता है उसका उपयोग कैसे करना है ये आपके ऊपर निर्भर करता हैं ।
वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..
हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं
पहचान बनानी है तो
जैसे आपके दोस्त होंगे वैसा ही आपका भविष्य बनेगा
गुरू केवल आपको शिक्षा दे सकता है उसका उपयोग कैसे करना है ये आपके ऊपर निर्भर करता हैं ।
वक्त बदलने से उतनी तकलीफ़ नहीं होती. जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है..
हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
"ज़िन्दगी" में कभी किसी "बुरे दिन" से सामना हो जाये तो इतना "हौसला" जरूर रखना "दिन" बुरा था "ज़िन्दगी" नहीं