“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे
देख लिया खुद को बिजी रख कर भी फिर भी याद सिर्फ तुम्हारी आती हैं.
दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
जिनके दिल बहोत अच्छे होते हैं, अकसर किस्मत उनकी ही खराब होती है.
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
तुम बेवफा नही मगर इतना ज़रूर हैं तुम पहले जैसे थे अब वैसे नही रहे
देख लिया खुद को बिजी रख कर भी फिर भी याद सिर्फ तुम्हारी आती हैं.
दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
जिनके दिल बहोत अच्छे होते हैं, अकसर किस्मत उनकी ही खराब होती है.
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .