सुप्रभात चलने की कोशिश तो करो दिशाए बहुत है, रास्ते पर बिखरे काटों से मत डरो तुम्हारे साथ दुआए बहुत है|

सुप्रभात चलने की कोशिश तो करो दिशाए बहुत है, रास्ते पर बिखरे काटों से मत डरो तुम्हारे साथ दुआए बहुत है|

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तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

मै रात भर जन्‍नत की सैर करता रहा यारों, आंख खुली तोह देखा सर माँ के कदमो मे था.

मिलता तो बहुत है इस जिंदगी में, बस हम गिनती उसी की करते है, जो हासिल न हो सका

अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो

पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।

तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

मै रात भर जन्‍नत की सैर करता रहा यारों, आंख खुली तोह देखा सर माँ के कदमो मे था.

मिलता तो बहुत है इस जिंदगी में, बस हम गिनती उसी की करते है, जो हासिल न हो सका

अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है

जिसने साथ दिया उसका साथ दो परंतु जिसने त्याग दिया उसे तुम भी त्याग दो

पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।