सुप्रभात चलने की कोशिश तो करो दिशाए बहुत है, रास्ते पर बिखरे काटों से मत डरो तुम्हारे साथ दुआए बहुत है|

सुप्रभात चलने की कोशिश तो करो दिशाए बहुत है, रास्ते पर बिखरे काटों से मत डरो तुम्हारे साथ दुआए बहुत है|

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कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे

कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है

गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती

कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!

ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं

नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता

चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे

कुछ भी "कर्म करो" हमेशा एक बात ध्यान रखो की “परमात्मा" Online है

गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती