इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है
लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता
भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.
इंतजार मत करिए सही समय कभी नहीं आएग
इंसान का व्यक्तित्व तब ही उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है
लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता
भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.
इंतजार मत करिए सही समय कभी नहीं आएग