जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।
जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।