सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।
अवसर का इंतजार नही निर्माण करना सीखो
लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
जब रिश्तों में झूठ बोलने की आवश्यकता महसूस होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि रिश्ता समाप्ति की ओर है।
अवसर का इंतजार नही निर्माण करना सीखो
लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं