"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..
हार आपसे आपका धन छीन सकती है लेकिन आपका
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..
अपनी अमीरी के चर्चे कभी किसी से ना करे क्योंकि आपके सुख से सूखी होने वाले इस दुनिया मे आपके माता-पिता के अतरिक्त कोई तीसरा नही होग
अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता
"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..
हार आपसे आपका धन छीन सकती है लेकिन आपका
काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..
अपनी अमीरी के चर्चे कभी किसी से ना करे क्योंकि आपके सुख से सूखी होने वाले इस दुनिया मे आपके माता-पिता के अतरिक्त कोई तीसरा नही होग
अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता