सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
कभी दूसरों को दिखाने के लिए कोई काम मत करना काम ऐसे करें, कि सभी आपको देखते ही रह जाए
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
अपनी बातों को सदैव ध्यानपूर्वक कहे क्योंकि हम तो कहकर भूल जाते है, लेकिन लोग उसे याद रखते है।
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
कभी दूसरों को दिखाने के लिए कोई काम मत करना काम ऐसे करें, कि सभी आपको देखते ही रह जाए
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
अपनी बातों को सदैव ध्यानपूर्वक कहे क्योंकि हम तो कहकर भूल जाते है, लेकिन लोग उसे याद रखते है।
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.