"मुझ से दो कतरे भी आँसू के छुपाये ना गए, माँ तो आँखों मैं समन्दर को छुपा लेती है"..

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मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो

उस काम का चयन कीजिये जिसे आप पसंद करते हों, फिर आप पूरी ज़िन्दगी एक दिन भी काम नहीं करंगे

उस मंजिल को पाने के लिए ध्यान केंद्रित करो जिसे आप पाना चाहते हो न कि वर्तमान स्थितियों पर जिसमें आप जी रहे हो।

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती

कोई भी काम कठिन हो सकता है लेकिन असंभव नही

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