पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है
" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
सफ़लता की खुशियां मनाना ठीक है, लेकिन असफलताओं से सबक सीखना अधिक महत्वपूर्ण है।
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं
पीछे मुड़कर देखने मे कोई समझदारी नही है जबकि आपके पास आगे देखने के लिए बहुत कुछ है
" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
सफ़लता की खुशियां मनाना ठीक है, लेकिन असफलताओं से सबक सीखना अधिक महत्वपूर्ण है।
किरण चाहे सूरज की हो या आशा की जीवन के सभी अंधकार को मिटा देती हैं