अच्छे के साथ अच्छा बने बुरे के साथ बुरा नही क्योंकि हीरे से हीरे को तराश तो जा सकता है लेकिन कीचड़ से कीचड़ साफ नही हो सकता
हर एक की सुनो ओर हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई , सब कुछ नही जानता लेकिन हर एक कुछ ना कुछ
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो
सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
अच्छे के साथ अच्छा बने बुरे के साथ बुरा नही क्योंकि हीरे से हीरे को तराश तो जा सकता है लेकिन कीचड़ से कीचड़ साफ नही हो सकता
हर एक की सुनो ओर हर एक से सीखो क्योंकि हर कोई , सब कुछ नही जानता लेकिन हर एक कुछ ना कुछ
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो
सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.