अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है
लोगो की बातों पे गौर करना, वो बातों से अच्छा चाहते है इरादों से नही
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है
लोगो की बातों पे गौर करना, वो बातों से अच्छा चाहते है इरादों से नही
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये