ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती
ज़िन्दगी में आप जितना कम बोलते है आपकी उतनी ज्यादा सुनी जाएगा
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
किस्मत सिर्फ मेहनत करने से बदलती है बैठ कर सोचते रहने से नहीं
अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं
ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती
ज़िन्दगी में आप जितना कम बोलते है आपकी उतनी ज्यादा सुनी जाएगा
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
किस्मत सिर्फ मेहनत करने से बदलती है बैठ कर सोचते रहने से नहीं
अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं