जहाँ दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना ही बेहतर होता है
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
चंचल चित वाले के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।
जहाँ दूसरों को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना ही बेहतर होता है
प्रत्येक "इन्सान" अपनी जुबान के पीछे छुपा होता है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसको बोलने दो.
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
चंचल चित वाले के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।