कम्फर्ट जोन से बहार निकलिए. आप तभी आगे बढ़ कर सकते है, जब कुछ नया आजमाने को तैयार हो

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अधेरा वहां नहीं है जहां तन गरीब है अंधेरा वहां है जहां मन गरीब है

पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े

हारे हुए इंसान की सलाह, जीते हुए इंसान का अनुभव और ख़ुद का दिमाग़ आपको कभी हारने नहीं देगा

जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है

मिट्टी का मटका और परिवार की क़ीमत सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं !!

अधेरा वहां नहीं है जहां तन गरीब है अंधेरा वहां है जहां मन गरीब है

पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।

क्रोध में भी शब्दो का चुनाव ऐसा होना चाहिए कि कल जब गुस्सा उतरे तो खुद की नजरों में शर्मिंदा न होना पड़े

हारे हुए इंसान की सलाह, जीते हुए इंसान का अनुभव और ख़ुद का दिमाग़ आपको कभी हारने नहीं देगा

जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है

मिट्टी का मटका और परिवार की क़ीमत सिर्फ बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं !!