अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो, तरीके बदलो.. ईरादे नही
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है
इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
इस संसार में अनेक लोग योग्यताओं का पिटारा लेकर घूम रहे हैं, लेकिन उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वे किसी प्लेटफार्म की नहीं बल्कि धन की तलाश कर रहे हैं।
अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो, तरीके बदलो.. ईरादे नही
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है
इंसान की बुद्धिमानी उसके चेहरे या कपड़ो से नही होती बल्कि उसकी आदतों और बातचीत करने के तरीके से झलकती है
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
इस संसार में अनेक लोग योग्यताओं का पिटारा लेकर घूम रहे हैं, लेकिन उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वे किसी प्लेटफार्म की नहीं बल्कि धन की तलाश कर रहे हैं।