अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में इतनी "गलतियां" नहीं होती जितना "दुनिया" का ख्याल और "लिहाज़" रखकर चलने में होती है।
ज़िंदगी में समस्या देने वाले की हस्ती कितनी भी बड़ी क्यों न हो.... पर भगवान की "कृपादृष्टि" से बड़ी नहीं हो सकती!!
कामयाबी के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं.. छांव मिलते ही कदम रुकने लगते है..
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं
अगर आपमें अहंकार है और आपको बहुत गुस्सा आता है तो ज़िन्दगी में आपको किसी और दुश्मन की कोई ज़रूरत नहीं
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में इतनी "गलतियां" नहीं होती जितना "दुनिया" का ख्याल और "लिहाज़" रखकर चलने में होती है।
ज़िंदगी में समस्या देने वाले की हस्ती कितनी भी बड़ी क्यों न हो.... पर भगवान की "कृपादृष्टि" से बड़ी नहीं हो सकती!!
कामयाबी के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं.. छांव मिलते ही कदम रुकने लगते है..
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं