कहते है कि औरत की उम्र और पुरुष की कमाई कभी नही पूछनी चाहिए उसका अच्छा सा कारण यह है कि औरत कभी अपने लिए नही जीती और पुरुष कभी अपने लिए नही कमाता..
वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है
हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है
उतनी देर तक ही खामोश रहो, जब तक लोग तुम्हें कमजोर न समझे
जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
दुर्जन को साहस से, बलवान को अनुकूल व्यवहार से और समान शक्तिशाली को नम्रता से अथवा अपनी ताकत से वश में करना चाहिए.
कहते है कि औरत की उम्र और पुरुष की कमाई कभी नही पूछनी चाहिए उसका अच्छा सा कारण यह है कि औरत कभी अपने लिए नही जीती और पुरुष कभी अपने लिए नही कमाता..
वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है
हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है
उतनी देर तक ही खामोश रहो, जब तक लोग तुम्हें कमजोर न समझे
जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
दुर्जन को साहस से, बलवान को अनुकूल व्यवहार से और समान शक्तिशाली को नम्रता से अथवा अपनी ताकत से वश में करना चाहिए.