जब हम अपने रिश्ते के लिए वक्त नहीं निकाल पाते है तो वक्त हमारे बिच से रिश्ता निकल देता है !!

जब हम अपने रिश्ते के लिए वक्त नहीं निकाल पाते है तो वक्त हमारे बिच से रिश्ता निकल देता है !!

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मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |

एक उम्र बीत जाती है किसी को अपना बनाने में और एक पल काफी होता है किसी अपने को गवाने में

मुझे हँसता हुआ देखा तो परेशान सा लगा....वह तो रिस्ते हुये जख्म देखने आया था मेरे...

आज कितने दिनो बाद हुई यह बरसात याद दिलाती यह आपकी हर बात......

मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

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तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |

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