खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.

खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.

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मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!

किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी

चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!

किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…