मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!
बहुत कुछ पाने वाले बहुत कुछ खोया करते हैं, इस दुनिया में हस्सने वाले सबसे ज़्यादा रोया करते हैं
जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये
मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!
बहुत कुछ पाने वाले बहुत कुछ खोया करते हैं, इस दुनिया में हस्सने वाले सबसे ज़्यादा रोया करते हैं
जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये