आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!
खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे
वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!
खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे
वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।