ज़िन्दगी में जब तक भागते भागते काम करो जब तक सोते सोते पैसा आना शुरू न हो जाये
लक्ष्मी की चोरी हो सकती है लेकिन सरस्वती की नही इसलिए अपने बच्चो को धनवान बनाने से पहले शिक्षित बनाये
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
लोग जब पूछते है कि आप क्या काम करते है तो असल में वो हिसाब लगाते है कि आपको कितनी इज़्ज़त देनी है
ज़िन्दगी में जब तक भागते भागते काम करो जब तक सोते सोते पैसा आना शुरू न हो जाये
लक्ष्मी की चोरी हो सकती है लेकिन सरस्वती की नही इसलिए अपने बच्चो को धनवान बनाने से पहले शिक्षित बनाये
दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से|
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है
लोग जब पूछते है कि आप क्या काम करते है तो असल में वो हिसाब लगाते है कि आपको कितनी इज़्ज़त देनी है