जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!
क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!
क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का