डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
हजारो चेहरों में उसकी झलक मिली मुझको.. पर. दिल भी जिद पे अड़ा था कि अगर बो नहीं, तो उसके जैसा भी नहीं।
अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!
डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
हजारो चेहरों में उसकी झलक मिली मुझको.. पर. दिल भी जिद पे अड़ा था कि अगर बो नहीं, तो उसके जैसा भी नहीं।
अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!