उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की । हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!! तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है
रात नई हैं, यादें पुरानी!
उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की । हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!! तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है
रात नई हैं, यादें पुरानी!