बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!
मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।
बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!
मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।