एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......