उस दिन चैन तो तुम्हारा भी उड़ेगा जिस दिन हम तुम्हे लिखना छोड़ देंगे |
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये
अच्छे इंसान मतलबी नहीं होते, बस दूर हो जाते हैं, उन लोगों से जिन्हें उनकी कद्र नहीं होती....
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!
उस दिन चैन तो तुम्हारा भी उड़ेगा जिस दिन हम तुम्हे लिखना छोड़ देंगे |
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये
अच्छे इंसान मतलबी नहीं होते, बस दूर हो जाते हैं, उन लोगों से जिन्हें उनकी कद्र नहीं होती....
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!