यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
रात नई हैं, यादें पुरानी!
सिर्फ़ उम्र ही नहीं कुछ हादसे भी तजुर्बे बेहिसाब दे जाते है।
इश्क़ में इतनी बेपरवाहियाँ भी ठीक नही हैं, बात हम नही करते ...तो तकल्लुफ तुम भी नही करते...!!
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
रात नई हैं, यादें पुरानी!
सिर्फ़ उम्र ही नहीं कुछ हादसे भी तजुर्बे बेहिसाब दे जाते है।
इश्क़ में इतनी बेपरवाहियाँ भी ठीक नही हैं, बात हम नही करते ...तो तकल्लुफ तुम भी नही करते...!!