चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?
वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
रात नई हैं, यादें पुरानी!
याद हैं हमको अपने तीनो गुनाह ! एक तो मोहबत कर ली, दूसरा तुमसे कर ली और तीसरा बेपनाह कर ली...!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?
वो जान गया हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है; इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
रात नई हैं, यादें पुरानी!
याद हैं हमको अपने तीनो गुनाह ! एक तो मोहबत कर ली, दूसरा तुमसे कर ली और तीसरा बेपनाह कर ली...!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...