लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

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मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

कोई पूछेगा तो सुबह का भूला कह देंगे, तुम आओ तो सही,हम शाम को सवेरा कह देंगे

बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

कोई पूछेगा तो सुबह का भूला कह देंगे, तुम आओ तो सही,हम शाम को सवेरा कह देंगे

बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए