लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

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रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

मेरी मोहबत की मजार तो आज भी वहीं है, बस तेरे ही सजदे की जगह बदल गई..!!

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।

जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

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