ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

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उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....

उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....