मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में "छाया" बुढ़ापे में "काया" और अंत समय में "माया" किसी का साथ नहीं देती
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
जीवन मे धोखा खाना भी बहुत जरूरी है क्योंकि चलना माँ-बाप सिखा देते है लेकिन संभलना खुद ही सीखना पड़ता है
कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है
मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में "छाया" बुढ़ापे में "काया" और अंत समय में "माया" किसी का साथ नहीं देती
एक अच्छी शुरुआत के लिए कोई भी दिन बुरा नहीं होता
अगर ईश्वर ने आपको नई शुरुआत करने का मौका दिया है, फिर पुरानी गलतियों को मत दोहराए
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
जीवन मे धोखा खाना भी बहुत जरूरी है क्योंकि चलना माँ-बाप सिखा देते है लेकिन संभलना खुद ही सीखना पड़ता है
कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है