शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया
इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया
इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..