दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
बिखरे पल, भीगी पलके और ये तन्हाई है.....कुछ सौगाते है जो मोहब्बत से कमाई है....
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.
बिखरे पल, भीगी पलके और ये तन्हाई है.....कुछ सौगाते है जो मोहब्बत से कमाई है....
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम