क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

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भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !

वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है

लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते…

अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर.....

लाख तेरे चाहने वाले होंगे मगर तुझे महसूस सिर्फ मैंने किया है

भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !

वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है

लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते…

अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर.....

लाख तेरे चाहने वाले होंगे मगर तुझे महसूस सिर्फ मैंने किया है