क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

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तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...

इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!

ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है

अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर.....

शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.

तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...

इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!

ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है

अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर.....

शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.