निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...

निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...

Share:

More Like This

बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....

लोग कहते है के जब कोई अपना दूर चला जाए तो तकलीफ होती है, परन्तु असली तकलीफ तोह तब होती है जब कोई अपना, पास होकर भी दूरियां बना ले !

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

मेरी कोशीश हमेशा ही नाकाम रही पहले तूझे पाने की और अब तुझे भुलाने की

बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....

लोग कहते है के जब कोई अपना दूर चला जाए तो तकलीफ होती है, परन्तु असली तकलीफ तोह तब होती है जब कोई अपना, पास होकर भी दूरियां बना ले !

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

मेरी कोशीश हमेशा ही नाकाम रही पहले तूझे पाने की और अब तुझे भुलाने की