कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

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हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.

जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से

हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.

जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से