वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं, रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है
उस दिन चैन तो तुम्हारा भी उड़ेगा जिस दिन हम तुम्हे लिखना छोड़ देंगे |
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।
वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं, रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है
उस दिन चैन तो तुम्हारा भी उड़ेगा जिस दिन हम तुम्हे लिखना छोड़ देंगे |
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।