वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले
वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आए, कि तुम होते कौन हो मेरे ख़्वाबों में आने वाले