काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना

काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना

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जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।

दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।

दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये