अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

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मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!

दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता...वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं...!

दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?