काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
ना शाखों ने जगह दी ,, ना हवाओं ने बख्शा..! मैं हूँ टुटा हुआ पत्ता. आवारा ना बनता तो क्या करता
डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
ना शाखों ने जगह दी ,, ना हवाओं ने बख्शा..! मैं हूँ टुटा हुआ पत्ता. आवारा ना बनता तो क्या करता
डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.