क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!
कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो
हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!
कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो
हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए