रात नई हैं, यादें पुरानी!
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....
अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!
मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !!
रात नई हैं, यादें पुरानी!
रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....
अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
आज सोचा कि…. कुछ तेरे सिवा सोचूँ ..!!!. अभी तक इसी सोच में हूँ कि क्या सोचूँ ..!!!
मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !!