गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
कुछ इस तरह खूबसूरत रिश्ते टूट जाया करते हैं जब दिल भर जाता है तो लोग अक्सर रूठ जाया करते हैं
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
कुछ इस तरह खूबसूरत रिश्ते टूट जाया करते हैं जब दिल भर जाता है तो लोग अक्सर रूठ जाया करते हैं
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं