गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

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जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता

बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकींन कितना था, था तो ख्वाब, मगर हसीन कितना था |

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह, उसने भी मेरी तरह किसी पत्थर को अपना समजा होगा

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता

बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकींन कितना था, था तो ख्वाब, मगर हसीन कितना था |

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह, उसने भी मेरी तरह किसी पत्थर को अपना समजा होगा

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी