गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

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बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..

आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की

मोहब्बत नहीं है उसे मुझसे ये जानता हूँ मैं फिर भी ये बात कहाँ मानता हूँ मैं

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..

यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...

बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..

आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की

मोहब्बत नहीं है उसे मुझसे ये जानता हूँ मैं फिर भी ये बात कहाँ मानता हूँ मैं

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..

यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...